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बुद्ध को भिक्षा

1 comments

भगवान् बुद्ध लंबे अरसे के बाद सदाचार धरम का प्रचार करते हुए कपिलवस्तु पधारे ! उन्हें भली भाँती स्मरण था की यशोधरा के अनूठे त्याग के बिना वह इस स्थिति में नहीं पहुँच सकते थे ! यशोधरा के प्रति एक बार वह कृत्यागता ज्ञापन करना चाहते थे ! इसलिए वह महल में भिक्षा लेने जा पहुंचे !
समाचार मिलते ही यशोधरा खुशी खुशी उनके दर्शनों के लिए जा पहुँची दोनों आमने सामने भावः विह्वल खड़े थे ! भगवान् बुध बोले यशोधरा आज मैं भिक्षा लेने तुम्हारे द्वार पर आया हूँ ! क्या तुम मुझे भिक्षा दोगी ?
यशोधरा ने कहा आपके गृह त्याग के बाद भला मेरे पास और क्या रह गया है ! कुछ क्षण विचार मगन होने के बाद उन्होंने कहा भगवान् मैं भिक्षा मैं जो भी दूंगी क्या आप उसे स्वीकार करेंगे ? भगवान् बुध ने कहा भिक्षु धर्म की मर्यादा का उलंघन नहीं होगा तो अवश्य स्वीकार कर लूंगा !
यशोधरा ने पुत्र राहुल को पुकारा आने के बाद वह बोली राहुल को भी अपनी पितृ परम्परा निभाने लिए अवसर दीजिये ! उन्होंने राहुल से कहा पुत्र पितृ परम्परा का अनुसरण करो बुध की शरण में जा कर अपना जीवन सार्थक करो ! यशोधराऔर बुध के संस्कारी पुत्र राहुल ने बुध के चरण स्पर्श किए और वह उनका शिष्य बन कर साथ चल दिया !

One Response so far.

  1. माननीय रोशन जी ,मेरे ब्लॉग का अनुसरण करने के लिए धन्यवाद आपका यह महात्मा बुद्ध का लेख मुझे बचपन में पढी हुई वह कविता याद दिला गया --माँ कह एक कहानी .......आपको साधुवाद !

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