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हिमाचल के स्कूलों में

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हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड जर्मन सरकार के मैक्समूलर भवन और गैर सरकारी संस्था गोथे इंस्टीटयूट के सहयोग से प्रदेश के चुनिंदा स्कूलों में जर्मन भाषा का वैकल्पिक कोर्स शुरू करेगा। 20 से 27 जून तक जर्मन यात्रा से लौटे प्रदेश शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. सीएल गुप्त ने बताया कि जर्मन की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विस्तारीकरण के मद्देनजर जर्मन भाषा के ज्ञाताओं की कमी को दूर करने के लिए जर्मन सरकार ने विश्व भर में एक हजार पार्टनर स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। जर्मन सरकार के इस निर्णय के तहत संचालित किए जाने वाले पार्टनर स्कूलों में जहां अध्यापकों का प्रशिक्षण और सिलेबस जर्मन सरकार की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा, वहीं आधारभूत ढांचा मुहैया कराने की जिम्मेदारी संबंधित शिक्षा बोर्डो की होगी। देश में दिल्ली, बेंगलुरु और गुजरात के शिक्षा बोर्डो ने कोर्स शुरू कर दिए हैं। प्रदेश विश्विद्यालय में जर्मन भाषा के कोर्स चल रहे हैं।
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हिमाचल के स्कूलों में विद्यार्थियों की स्कूल छोड़ने की दर अन्य राज्यों की अपेक्षा सबसे कम है। राज्यों में ऐलीमेंटरी एजूकेशन की समीक्षा के लिए गठित टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है। कम ड्राप आउट की दर में प्रदेश को पहला स्थान मिला है। साक्षरता दर के मामले में पहले स्थान पर रहने वाले केरल राज्य को भी ड्राप आउट रेट के मामले में दूसरा स्थान मिला है। उत्तराखंड की इस मामले स्थिति बेहतर हुई है और वह तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। यूनाइटेड नेशन डवलपमेंट प्रोगाम और प्लानिंग कमीशन के लगभग एक दर्जन विशेषज्ञों के माध्यम से यह रिपोर्ट तैयार की है। ड्राप आउट रेट की दर देखी जाए तो हिमाचल में प्राइमरी स्तर पर यह 2.05 फीसदी है। शिक्षा विभाग के ताजा सर्वे के अनुसार राज्य के चार जिलों ने ड्राप आउट रेट को शून्य फीसदी लाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इन जिलों में लाहौल स्पीति, हमीरपुर, बिलासपुर और सोलन जिला शामिल हैं। इन सभी जिलों में पहली से पांचवी कक्षा तक कोई भी छात्र पढ़ाई छोड़ कर नहीं गया है। पूरे प्रदेश के स्कूलों पर कराए गए सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के स्कूलों में पहली कक्षा में कुल 92,025 बच्चों ने प्रवेश लिया था। इनमें 90,133 ने पांचवी कक्षा तक पढ़ाई पूरी की । इन बच्चों में से केवल 1892 छात्र ही पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए।

2 Responses so far.

  1. जर्मन तो ठीक है पर हिन्दी को न भूल जाएं बस यही डर लगता है। चित्र बहुत सुन्दर लगे। अपने स्कूल की याद आ गयी। धन्यवाद।

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