Advertise

साहित्‍य सुगंध हिन्दी साहित्य की सेवा का मंच, है, आप भी सहयोग देना चाहते हैं तो अपना परिचय, तस्वीर,रचनायें -मेल पते पर प्रेषित करें।
 

रुमाल

2 comments
रुमाल आज हमारी एक खास ज़रूरत बन चुका है ! नाक हाथ या अपना पसीना साफ करने के लिए लोग इसका प्रयोग करते है ! यह बात बहुत कम लोग जानते है की रुमाल का प्रचालन कब और कहाँ हुआ ?  रुमाल बनाने का विचार सबसे पहले इंग्लेंड के रजा  रिचर्ड दो को सूझा उसने फ्रांस के राजा की बेटी से शादी की ! राजा बनाने के बाद रिचर्ड ने महसूस किया की उसके हाथ साफ़ करने और नाक पोंछने के लिए जो तोलिया काम में लिया जाता है वो बहुत ही वजन दार होता है ! तब उसने हुकुम दिया की सुन्दर रंगीन कपडों के छोट्टे छोट्टे टुकडे काट कर हाथ और नाक साफ करने के लिए तैयार किये जाये ! बस कपडे के छोटे टुकडे आगे चल कर रुमाल के रूप में प्रसिद्ध हुए ! अब जीवन में रुमाल एक महत्वपूरण  हिस्सा और सभ्यता की निशानी बन चुके है !  हिमाचल प्रदेश में चम्बा का रुमाल संसार में काफी प्रसिद्ध है !

2 Responses so far.

  1. aarkay says:

    रौशन जी इस रोचक जानकारी के लिए शुक्रिया . वैसे चंबा रुमाल की एक विशेषता यह भी है कि इस पर कि गयी कढ़ाई दोनों ओरे से एक सी दिखाई देती है.कुछ मास पूर्व एक प्रदर्शनी में एक बड़े आकार का चंबा रुमाल था जिसकी कीमत २.५ लाख रूपए थी .

Leave a Reply

 
[ साहित्‍य सुगंध पर प्रकाशित रचनाओं की मौलिकता के लिए सम्‍बधित प्रेषक ही उतरदायी होगा। साहित्‍य सुगंध पर प्रक‍ाशित रचनाओं को लेखक और स्रोत का उललेख करते हुए अन्‍यत्र प्रयोग किया जा सकता है । किसी रचना पर आपत्ति हो तो सूचित करें]
stats counter
THANKS FOR YOUR VISIT
साहित्‍य सुगंध © 2011 DheTemplate.com & Main Blogger. Supported by Makeityourring Diamond Engagement Rings

[ENRICHED BY : ADHARSHILA ] [ I ♥ BLOGGER ]