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प्रेम करो

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जेन  संत बेन्जोई ने अपना जीवन बच्चों को शिक्षा देने और उन्हें संस्कारित करने को समर्पित किया हुआ था वे अपने आश्रम में शिक्षा देते की सभी से प्रेम करों ! असह्यों की सेवा  और मदद करों ! एक बार उनके यहाँ एक लड़का चोरी करते हुए पकड़ा गया ! संत ने उसे चोरी न करने की सलाह दी ! परन्तु उस लडके ने फिर चोरी की ! संत ने एक बार फिर उसे क्षमा  कर दिया  ! अन्य   शिष्य  इस बात से दुखी हुए की यह बार बार चोरी करता है और गुरुदेव इसे माफ़ कर देते है ! यह  बात उन्होंने सैट को बताई और कहा की  एसा चलेगा तो हम आश्रम छोड़ कर चले जायेगे ! संत  ने उन सभी को  समझाया की यह लड़का अपने पिता और भाइयों  द्वारा ठुकराया  गया और इसका पिता व्यसनी था ! इसे सुधरने का जिमा हमारा है ! सत ने उन्हें आगे समझाया की तुम अगर आश्रम से चले जाओगे तो अन्य कोई अध्यापक  तुम्हे शिक्षा दे सकता है परन्तु  इस लडके को कोई भी अपने पास नहीं रखना  चाहेगा ! इसे सुधरने का मोका नहीं मिलेगा ! अन्य शिष्यों के साथ उस बालक ने भी  संत की यह बात सुनी ! उसने सभी के सामने कसम खाई की वह भविष्य में कभी भी चोरी नहीं करेगा !आगे चल कर वह बालक सद्कार्यों में ही लगा रहा ! संत का प्रेम का पाठ  सभी शिष्यों ने आत्मसात किया !
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