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रतन चंद 'रत्नेश' की बाल-कविता :गुड़िया रानी

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गुड़िया रानी, गुड़िया रानी

बोलो क्यों करती नादानी


घरवालों को बिन बतलाए

बाहर तुम चली जाती हो

मम्मी को होती परेशानी

बोलो क्यों करती नादानी



कभी किसी घर छिप जाती हो

कभी राह भटक जाती हो

ऐसी भी आखिर क्या मनमानी

बोलो क्यों करती नादानी

घर पर बैठ खिलौने खेलो

चकले पर रोटी तुम बेलो

दादी अम्मा से सुनो कहानी

बोलो क्यों करती नादानी

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